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भारत में वहाबवाद के कारण है मुसलमानों के दो अलग विचारधारा के समाज

यह एक असमिया मुस्लिम भक्ति गीत का अनुवादित संस्करण है। तीन सौ साल पहले एक सूफी संत द्वारा लिखा गया यह गीत असम में हिन्दुओं और मुसलमानों और एकता की मिसाल बनकर खड़ा हुआ है। एक समर्पित सूफी गायक वाजिदुर रहमान ने इस गीत का हिंदी में अनुवाद किया है। उनका मानना है कि इस गीत में भाईचारे का संदेश सभी बाधाओं को पार कर जाना चाहिए। उन्होंने कहा है कि इस संदेश को मैं भारत के कोने कोने तक ले जाने की कोशिश की है इसलिए मैं ये हिंदी में अनुवाद किया और बहुत लोगों का समर्थन मिला है। रहमान का कहना है कि उन्हें सूफी संगीत पंसद है। यह भारत है, जहां मुस्लिम भक्ति गीतों को हिन्दुओं के बीच संरक्षक और श्रोता मिलते हैं। वह मुस्लिम विद्वान अल्लामा सैयद अब्दुल्ला तारिक हैं। यहां भगवान शिव की एक पेंटिंग की पृष्ठभूमि पर वे प्राचीन भारतीय संस्कृति की विरासत के विस्तार की व्याख्या करते हैं। उनका कहना है कि नमाज शब्द की उत्पति भारत में हुई है और वह अखंड भारत को सांस्कृतिक इकाई कहते हैं। यह एक ऐसा भारत है, जहां एक मुस्लिम विद्वान भारत की विरासत की सराहना करता है और सवांद का एक नया मार्ग बनाता है। यह वह भारत है जहां कानपुर देहात में भगवान श्री कपालेश्वर महादेव के एक ही मंदिर और दिल्ली में पीर निजामुद्दीन औलिया के एक ही मंदिर में हिन्दू और मुसलमान पूजा करते हैं। यह वह भारत भी है जहां वयस्क मुस्लिम महिलाएं में हिन्दू महिलाओं के समान अधिकारों का आनंद लेती हैं और पुरुष अभिभावक के बिना अपनर जीवन के फैसले खुद लेती हैं।