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Myanmar Firing News: म्यांमार में प्रदर्शनकारियों पर सेना की फायरिंग में 18 की मौत, दर्जनों घायल

म्यांमार में सुरक्षाबलों की फायरिंग में तीन की मौत। फाइल फोटो

सैनक तख्तापलट के बाद से म्यांमार के हालात लगातार खराब होते जा रहे हैं। सेना की गोली से 18 लोगों के मारे जाने की खबर है। लोकतंत्र की बहाली की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों के लिए यह रविवार खूनी रविवार साबित हुआ। म्यांमार के सैनिक शासक प्रदर्शनकारियों के मारे जाने की खबरों को दबाने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन मेडिकल वॉलिंटियर्स के माध्म से 18 प्रदर्शनकारियों के मारे जाने की खबर सामने आ ही गई।  

हालांकि अनाधिकारिक सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि मरने वालों की संख्या कुछ और भी हो सकती है क्योंकि जितने लोग इस फायरिंग में घायल हुए हैं, उनमें से अधिकांश की हालत गंभीर बताई जा रही है।

पिछले हफ्ते भी सैन्य शासन ने यांगून में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए सशस्त्र बलों का सहारा लिया, जिन्होंने न केवल लाठियां भांजी, अपितु कई लोगों की पिटाई भी की। एक फरवरी को जब नव-निर्वाचित संसद की कार्यवाही प्रारंभ होने वाली थी तो उससे पहले ही सेना ने इसे अपदस्थ करके प्रशासन व शासन का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। इसके बाद से ही बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर रहे हैं और देश में लोकतंत्र बहाली की मांग कर रहे हैं।

सैन्य शासन ने भले ही देश का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया हो, मगर लोकतंत्र की बहाली, स्टेट काउंसलर आंग सान सू ची और उनकी एनएलडी पार्टी के नेताओं की रिहाई की मांग कर रहे लोगों के बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन को रोकने में उसे नाकों चने चबाने पड़ रहे हैं। एनएलडी पार्टी को पिछले साल नवंबर महीने के चुनावों में भारी जीत मिली थी।

यांगून में दो वरिष्ठ संपादकों ने बताया कि सैन्य शासन अब 'हताश हो रहा है'। गिरफ्तारी के डर से नाम न छापने की शर्त पर एक वरिष्ठ संपादक ने कहा कि "रबर बुलेट, आंसू गैस और पानी की बौछार के व्यापक उपयोग के बावजूद सैन्य शासन के प्रति निष्ठावान सैनिक और पुलिस इन विरोध-प्रदर्शनों को तोड़ने में विफल रहे हैं। यहां तक कि शस्त्रों के इस्तेमाल के बाद भी प्रदर्शनकारियों को नहीं रोका जा सका है। इसलिए अब हताशा के कारण भीड़ पर गोलियां चलाई जा रही हैं।"

रविवार को यांगून और दावेई जैसे कई अन्य शहरों में भारी भीड़ देखी गई जहां सुरक्षा बलों ने अंधाधुंध गोलाबारी की। बचावकर्मी प्या जाव हीन और दावेई के दो स्थानीय पत्रकारों ने बताया कि कई प्रदर्शनकारियों को गोली मार दी गई और कई अन्य घायल हो गए।

हेन ने कहा कि उन घायलों में से कुछ के शरीर पर बुलेट के जख्म हैं, जबकि कई को रबर की गोलियां लगी हैं। उन्होंने कहा कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है क्योंकि अभी अधिक घायल लोग आ रहे हैं।

स्थानीय मीडिया आउटलेट 'दावेई वॉच' ने इस खबर की पुष्टि की कि रविवार को हुई गोलीबारी में तीन लोगों की मौत हो गई। 

यांगून शहर के अधिकारियों ने विरोध करने के उद्देश्य से इकट्ठा हो रही भीड़ को हटाने के लिए बल का इस्तेमाल किया, लेकिन परस्पर विरोधी खबरें आ रही थीं कि क्या सुरक्षा बलों ने भीड़ पर फायरिंग करने के लिए लाइव एम्यूनिशन (गोला बारूद) का इस्तेमाल किया, अथवा नहीं।

29-वर्षीय प्राइमरी स्कूल की शिक्षिका एमी क्यॉ ने कहा कि पुलिस ने आते ही फायरिंग शुरू कर दी। उन्होंने पहले कोई चेतावनी नहीं दी। भीड़ पर सीधे फायरिंग की जिससे कई लोग घायल हो गए। स्कूल के शिक्षक गिरफ्तारी के डर से छिप गए।

यांगून में अन्य जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने बांस से बनी ढालों के साथ खुद को बैरिकेड्स के पीछे तैनात किया। उन्होंने अपने बचाव के लिए गॉगल्स और फेस मास्क का भी इस्तेमाल किया क्योंकि पुलिस आंसू गैस के कनस्तर फेंक रही थी और सशस्त्र बल गुलेल से आयरन बॉल (लोहे की गेंद) चला रहे थे।