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भर दे मेरी झोली..चीन के दरवाजे पर पाकिस्तान के विदेश मंत्री कुरैशी

भर दे मेरी झोली..चीन के दरवाजे पर पाकिस्तान के विदेश मंत्री कुरैशी

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी और चीन के विदेश मंत्री वांग यी की कोहनियां मिलाती तस्वीर में कुरैशी काफी खुश नजर आ रहे थे। उन्होंने ट्वीट कर अपनी खुशी का इजहार भी किया। चीन रवाना होने से पहले कुरैशी ने वीडियो संदेश में कहा कि वह बहुत महत्वपूर्ण चीन यात्रा पर जा रहे हैं।

उन्होंने कहा, " मैं बहुत महत्वपूर्ण यात्रा पर चीन जा रहा हूं। मैंने इस संबंध में कल प्रधानमंत्री से चर्चा की। मेरा प्रतिनिधिमंडल देश के राजनीतिक एवं सैन्य नेतृत्व के रुख को प्रकट करेगा। मुझे उम्मीद है कि विदेश मंत्री वांग से मेरी मुलाकात दोनों देशों के लिए लाभदायक होगी।"

पाकिस्तानी सूत्रों के मुताबिक चीन के हैनान शहर में दोनों विदेश मंत्रियों के बीच पांच अहम मुद्दों पर खासा जोर रहा। सबसे पहला मुद्दा था पैसे का। पिछले दिनों चीन से 1 अरब डॉलर उधार लेकर पाकिस्तान ने सऊदी अरब के कर्ज की पहली किस्त चुकाई थी। लेकिन 2.6 अरब डॉलर की किस्त चुकानी बाकी है। पाकिस्तान इस हद तक कंगाल हो चुका है कि उसके पास पेंशन देने के लिए फूटी कौड़ी तक नहीं है। जाहिर है पाकिस्तान को इतनी बड़ी रकम चीन ही दे सकता है। लिहाजा कुरैशी कटोरा लिए चीन के पास पहुंचे थे।

दरअसल पिछले दो सप्ताह से कुरैशी खासे परेशान थे। 5 अगस्त को उन्होंने कश्मीर मसले पर सऊदी अरब को धमकी दे डाली थी। कुरैशी ने पिछले दिनों सऊदी अरब के नेतृत्व वाले संगठन 'इस्लामिक सहयोग संगठन' (ओआईसी) को सख्त चेतावनी दी थी कि वो कश्मीर मुद्दे पर भारत के खिलाफ कड़ा रुख नही अपना रहा है। कुरैशी ने यहां तक कहा था कि यदि इस मुद्दे पर वो हस्तक्षेप नहीं कर सकते हैं, तो वो खुद पीएम इमरान खान के नेतृत्व में उन इस्लामिक देशों की बैठक बुलाने को मजबूर होंगे, जो इस मुद्दे पर पाकिस्‍तान का साथ दे रहे हैं।

सऊदी अरब के पैसों पर पेट पालने वाले पाकिस्‍तान के विदेश मंत्री के इस बयान से नाराज सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्म्द बिन सलमान ने पाकिस्तान को जनवरी में दिए गए 3.2 अरब डॉलर का उधार वापस करने को कहा। नंगा खाए का क्या, निचोड़े का क्या..? पाकिस्तान ने पहली किस्त तो चीन से उधार ले कर दे दिया लेकिन बाकी कहां से लाए?

डैमेज कंट्रोल के लिए पाकिस्तानी आर्मी चीफ जनरल कमर वाजेद वाजवा और आईएसआई चीफ ले. जनरल फैज हामिद सऊदी अरब पहुंचे, लेकिन क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने बिना मिले उन्हें बैरंग वापस भेज दिया। यही नहीं, पाकिस्तानी आर्मी चीफ के दिए जाने वाले एक अवार्ड पर भी रोक लगा दी। तब से पाकिस्तान में राजनीतिक उथल-पुथल का माहौल बना हुआ है। खुद आर्मी चीफ बाजवा ने प्रधानमंत्री इमरान खान को अपनी नाराजगी से आगाह करा दिया है।

जानकारों का मानना है कि अब सिवाए चीन के पास जाने के इमरान खान के पास कोई दूसरा रास्ता नहीं था। विदेश मंत्री कुरैशी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नाम इमरान खान की चिट्ठी भी लेकर गए हैं। सूत्रों के मुताबिक इमरान खान ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग से आर्थिक मदद मांगी है। उन्होंने कहा है कि वो अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर पाकिस्तान और सऊदी अरब के रिश्ते को और बिगड़ने से बचा लें। जाहिर है परमाणु शक्ति के बावजूद पाकिस्तान की मुस्लिम देशों में कुछ साख नहीं है।

पिछले दिनों इमरान खान ने एक पाकिस्तानी चैनल को दिए गए इंटरव्यू में कहा था कि " सऊदी अरब पाकिस्तान का खास दोस्त है। हमेशा उसने पाकिस्तान की मदद की है लेकिन अब सऊदी की विदेश नीति के लिए पाकिस्तान तो अपनी नीति नहीं बदल सकता। चीन अच्छे और बुरे वक्त में हमेशा पाकिस्तान के साथ खड़ा रहा है, कश्मीर पर तो हमेशा हमारा साथ दिया है।" जाहिर है पाकिस्तान, भारत और चीन के बीच मौजूदा सबंध का पूरा फायदा उठाना चाह रहा है।

पाकिस्तान और तीन के मंत्रियों, कुरैशी और वांग यी के बीच चीन-पाकिस्तान आर्थिक कारीडोर फेज-2, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और गिलगिट-बाल्टिस्तान में निवेश पर भी बातचीत हुई। इस्लामाबाद ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक कारिडोर (CPEC) के जारी काम के लिए 2 अरब डॉलर की मांग की है।

इमरान खान ने तो साफ कर दिया कि अगर सऊदी अरब और दूसरे देश पाकिस्तान का साथ ना भी दें तो परवाह नहीं। चीन के राष्ट्रपति इस साल के अंत में पाकिस्तान के दौरे पर आ रहे हैं और इस दौरान कई महत्वपूर्ण समझौते होंगे। चीन ने शिक्षा, कृषि जैसे हर क्षेत्र में मदद देने का भरोसा दिया है। इमरान खान के मुताबिक, " चाईना सबसे तेजी से बढ़ती इकानमी है । इसीलिए हमारे जो रिश्ते हैं हम और मजबूत कर रहे हैं। सीपेक(CPEC) एक बड़ी आपुरचुनिटी (Opportunity) है। चाईना को भी पाकिस्तान की बड़ी जरुरत है। तो अगर यह होना है तो फिर और ज्यादा इंपार्टेंट है चाईना हमारे लिए।"

पाकिस्तान सरकार ने गिलगिट और बाल्टिस्तान में चीनी कंपनियों को अवैध रूप से सोना, यूरेनियम और मोलिब्डेनम का खनन करने के लिए 2,000 से अधिक खानें लीज पर दे दी हैं। इमरान खान सरकार ने पर्यावरण के मानदंडों को भी हवा में उड़ा दिया है। इस मामले का खुलासा करते हुए निर्वासित नेता और गिलगिट-बाल्टिस्तान क्षेत्र के एक राजनीतिक संगठन यूनाइटेड कश्मीर पीपल्स नैशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) के प्रवक्ता नासिर अजीज खान ने बताया, " हम अगले महीने जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र के सम्मेलन में प्राकृतिक संसाधनों को लूटने की पाकिस्तान की इस साजिश का पर्दाफास करेंगे। यहां नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। मीडिया इसकी रिपोर्ट नहीं कर सकती है।"

दरअसल, विकास के नाम पर चीन और पाकिस्तान मिल कर भारत के घेरने की कोशिश कर रहे हैं और पाकिस्तान की कोशिश है ज्यादा से ज्यादा पैसे चीन से मिल सकें। पाकिस्तान के हुक्मरान अब इस बात को खुल कर कह रहे हैं। प्रधानमंत्री इमरान खान का कहना है कि "चाईन को पता है कि पाकिस्तान की एक स्ट्रैटेजिक लोकेशन है। इस अहमियत को चाईना जानता है..हमारी लिंकेज बढ़ती जाएंगी, हमारा फायदा है। हमारी बदकिस्मती है कि हिन्दुस्तान की वजह से हमारे दोस्त चाईना को कंटनेन्ड करना चाहते हैं।"

पाकिस्तान की मुश्किलें कुछ ऐसी हैं जहां चीन भी मदद नहीं कर पाएगा। पाकिस्तान जून 2018 से फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ)की ग्रे सूची में है, क्योंकि इस्लामाबाद ने आतंकियों की वित्तीय मदद, फंडिंग और उनके सुरक्षित ठिकानों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है। संस्था का मानना है कि पाकिस्तान लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों को मिलेने वाली फंडिंग पर नकेल कसने में नाकाम रहा है। यदि पाकिस्तान एक्शन प्लान पर संतोषजनक काम नहीं करता है तो अगली बैठक में एफएटीएफ सदस्य इसके खिलाफ वोट करके पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट में डाल सकते हैं। तब अंतर्राष्ट्रीय वित्त व्यवस्था से पाकिस्तान पूरी तरह बाहर हो जाएगा।.