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Pakistan: इमरान खान की कुर्सी जाएगी या बाजवा की फौज फिर बचाएगी, पार्टी दो फाड़, दूसरे गुट ने नेता भी चुना

Pakistan - PM Imran Khan in Turmoil

पाकिस्तान की सरकार अल्पमत में आ गई है। सच्चाई यही है तो इमरान खान अभी तक प्रधानमंत्री की कुर्सी पर कैसे बैठे हुए हैं?इस सवाल का जवाब बड़ा आसान है। पाकिस्तान में फौज सरकार को चलाती है। पाकिस्तान की नेशनल असैंबली में वैसा ही होता है जैसा फौज से निर्देश देती है। इसलिए जैसे सहयोगी दलों के समर्थन वापस लेने से अल्पमत में आई इमरान सरकार चलती रही वैसे ही अब भी अपने ही दल में दो गुट बन जाने और दूसरे गुट का नया नेता चुने जाने के बाद भी इमरान खान प्रधानमंत्री की कुर्सी पर आसीन हैं।

पीएम इमरान खान के कभी सबसे खास माने जाने वाले जहांगीर तरीन ने अब इमरान खान के खिलाफ ही बगावत कर दी है। जहांगीर तरीन के खिलाफ चीनी स्कैम में जांच चल रही है। कुछ दिन पहले अपने गुट के सांसदों के साथ जहांगीर तरीन ने इमरान खान से मुलाकात की थी। तब ऐसा माना जा रहा था कि जहांगीर तरीन से इमरान खान की कोई नाराजगी नहीं है। और जहांगीर तरीन के खिलाफ जो जांच बैठाई गई है वो भी वापस ले ली जाएगी।

जहांगीर तरीन ने अपने गुट के सांसदों से साथ इमरान खान से मुलाकात से यह संदेश दिया था कि अगर उनके खिलाफ जांच बंद नहीं की तो वो सरकार गिरा देंगे। जहांगीर तरीन ने किया भी कुछ ऐसा ही। जब जांच बंद नहीं हुईं तो जहांगीर तरीन ने पार्टी में अलग गुट बना लिया।

इस गुट ने संसद में अपने नेता का भी चयन कर लिया है। सत्तारूढ़ दल तहरीक ए इंसाफ (पीटीआइ) पार्टी की सरकार से असंतुष्ट 31सांसदों ने जहांगीर खान तारीन के नेतृत्व में पार्टी से अलग समूह बना लिया है। ये सांसद अपनी रणनीति खुद ही तैयार करेंगे। संसद में उनके नेता राजा रियाज होंगे। पंजाब विधानसभा में सईद अकबर नवानी पार्टी के असंतुष्ट विधायकों का नेतृत्व करेंगे। असंतुष्ट नेता तारीन के एक करीबी ने बताया कि 18मई को तारीन के निवास पर एक दावत में सभी असंतुष्ट 31सांसद शामिल हुए थे, यहां पर पंजाब विधान सभा के पार्टी विधायक भी मौजूद थे।

दावत के दौरान औपचारिक रूप से अलग समूह बनाने की घोषणा की गई। साथ ही यह भी तय किया गया कि असंतुष्टों के नेता जहांगीर खान तारीन के खिलाफ दर्ज किए गए मामलों को लेकर संघर्ष किया जाएगा। माना जा रहा है कि पार्टी के ये सांसद किसी भी मामले में संसद में अपनी राय और रास्ता खुद ही तय करेंगे। ऐसी स्थिति में इमरान को अब दो तरफा मोर्चे का सामना करना होगा। सशक्त विपक्षी ही नहीं, पार्टी के सांसद भी उनकी खिलाफत करेंगे।