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POK : शारदा पीठ मंदिर इलाके में हिन्दू आबादी पूरी तरह खत्म

उरी से 75 किलोमीटर और श्रीनगर से करीब 100 किलोमीटर दूर पीओके में वास्तविक नियंत्रण रेखा से 10 किलोमीटर अंदर स्थित शारदा शक्तिपीठ मंदिर इलाके में हिन्दू आबादी पूरी तरह खत्म हो गई है।

पंकज श्रीवास्तव अपडेटेड November 20, 2020 14:44 IST
Sharada Shakti Peeth Temple
पीओके में स्थित शारदा शक्ति पीठ मंदिर

गिलगिट-बाल्टिस्तान में पाकिस्तान ने हाल ही में चुनाव कराए हैं, जिसे लेकर अब वहां के राजनीतिक दलों में खींचतान भी देखने को मिल रही है। हर एक दल दूसरे पर धांधली करने का आरोप लगा रहा है। गिलगिट-बाल्टिस्तान गुलाम जम्मू-कश्मीर का हिस्सा है। जिस पर पाकिस्तान ने 1948 में धोखे से हमला करके कब्ज़ा जमा लिया था। इसी इलाके में शारदा शक्ति पीठ मंदिर भी है। जो प्राचीन भारत के कालखंड में बना था और छठी से बारहवीं शताब्दी तक कश्मीरी पंडितों के बीच इसका खासा महत्व था।

कहा जाता है कि सम्राट अशोक के शासनकाल के दौरान 237 ईसा पूर्व में शारदा मंदिर की स्थापना हुई थी। विद्या की अधिष्ठात्री देवी को समर्पित यह मंदिर अध्ययन का एक प्राचीन केंद्र था। शारदा शक्ति पीठ मंदिर करीब 5 हजार वर्ष पुराना माना जाता है। यह शक्तिपीठ उरी से 75 किलोमीटर और श्रीनगर से करीब 100 किलोमीटर दूर पीओके में वास्तविक नियंत्रण रेखा के 10 किलोमीटर अंदर स्थित है। अयोध्या में राम मंदिर के भूमि पूजन के लिए शारदा पीठ से भी मिट्टी लाई गई। शारदा पीठ की मिट्टी मंगवाने के लिए चीन से हांगकांग और मुजफ्फराबाद के रास्ते खास ऑपरेशन चलाया गया।

वहां से मिट्टी लाने वाले चेन्नई के मूल निवासी और वर्तमान में चीन में बस चुके वेंकटेश रमन इससे पहले तमिलनाडु के कांची मठ और कर्नाटक के श्रृंगेरी मठ में शारदा पीठ की मिट्टी दे चुके थे। पीओके में चाइनीज पासपोर्ट धारक जा सकते हैं। ऐसे में चीन की नागरिकता ले चुके वेंकटेश रमन से संपर्क किया गया। वेंकटेश रमन हांगकांग के रास्ते से होते हुए पीओके की राजधानी मुजफ्फराबाद पहुंचे। वहां से शारदा पीठ गए और मंदिर के पुजारी से संपर्क किया और मिट्टी लेकर फिर हांगकांग के रास्ते दिल्ली पहुंचे।

गुलाम कश्मीर में शारदा शक्ति पीठ मंदिर के पूरे क्षेत्र में हिन्दुओं की एक बड़ी आबादी रहा करती थी। जो पाकिस्तान के कब्ज़ा कर लेने के बाद अत्याचार का शिकार हुई। इस आबादी के एक बड़े हिस्से ने बंटवारे के बाद वहां से भागकर अपनी जान बचाई। जो बचे-खुचे हिन्दू वहां रह गए थे, पाकिस्तान ने ज़ुल्म ढाकर उनमें से कई हिन्दुओं को मौत के घाट उतार दिया। जो हिन्दू पाकिस्तानियों के कब्ज़े में रह गए, उन्हें पाकिस्तान ने ज़बर्दस्ती तलवार की धार के नीचे मुसलमान बना दिया। ये बताने की ज़रूरत नहीं है कि पाकिस्तानियों ने वहां रहने वाली हिन्दू महिलाओं और बच्चियों पर कितने ज़ुल्म किये।

गुलाम कश्मीर की नीलम घाटी ज़िले में स्थित शारदा मंदिर भारत के 18 महाशक्ति पीठों में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। ये मंदिर शैव मत और बौद्धों का भी एक बड़ा शैक्षिक और आध्यात्मिक केन्द्र था। शारदा शक्ति पीठ मंदिर नालंदा और तक्षशिला विश्वविद्यालय के स्तर का दक्षिण एशिया में एक वृहद शिक्षण केन्द्र था। महान संस्कृत विद्वान और भाषा व्याकरणविद् पाणिनी की अष्टाध्यायी के संरक्षित संकलन पर यहां अध्ययन किया जाता था।

Sharada Shakti Peeth Temple located in POK
पीओके में स्थित शारदा शक्ति पीठ मंदिर में भारतीय श्रद्धालुओं को दर्शन-पूजन की अनुमति देने की मांग पहले भी हो चुकी है।

इसके अलावा भी कई प्राचीन ग्रंथों का यहां पर संकलन और अध्ययन किया जाता था। लेकिन बंटवारे के बाद इस मंदिर के साथ इसके पुस्तकालय को भी बहुत क्षति पहुंचाई गई। कई पाण्डुलिपियों को आग के हवाले कर दिया गया। एक पुरानी कहावत है कि अगर किसी देश का सर्वनाश करना हो तो उस देश के शिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालयों और शिक्षा से संबंधित शोध संस्थानों को नष्ट करो। वो देश अपने आप खत्म हो जाएगा।

मुस्लिम आक्रांताओं के बाद ये काम अंग्रेज़ों ने बखूबी किया। इसके बाद धर्म के आधार पर देश के बंटवारे ने इस ताबूत में आखिरी कील ठोंकने का काम किया। एक तरफ़ भारत में बंटवारे के बाद इस्लाम और उसके मानने वाले फलते-फूलते रहे, वहीं दूसरी तरफ़ भारत के दोनों पड़ोसी देशों में हिन्दू आबादी का लगातार ह्रास होता रहा। आज पाकिस्तान समेत बांग्लादेश में हिन्दू जनसंख्या नगण्य हो गई है।

पाकिस्तान के ज़ुल्मों के चलते आज शारदा मंदिर के क्षेत्र में एक भी हिन्दू नहीं रहता है। सिर्फ़ इतना ही नहीं, पाकिस्तान ने सुनियोजित तरीके से मंदिर को ध्वस्त कर दिया, मूर्तियों को खंडित किया और मंदिर के खज़ाने में जो पैसे, रत्नाभूषण थे उनकी लूट खसोट की। मंदिर में तोड़-फोड़ करना मुसलमान आक्रांताओं का एक जाना-पहचाना काम है। उनके मज़हब के मुताबिक किसी भी मूर्ति और मूर्ति पूजक को सहन नहीं किया जाता है। इस्लाम में मूर्ति-पूजा और मूर्तियां बनाना हराम है। इसी कॉन्सेप्ट के तहत बंटवारे के बाद पाकिस्तान ने अपने देश में कई मंदिरों को ज़मींदोज़ किया। आज शारदा मंदिर के सिर्फ़ अवशेष ही बाकी हैं।

जानकारों के अनुसार शारदा शक्तिपीठ मंदिर के आसपास के इलाके में रहने वाले ढेरों हिन्दू दीपावली का पर्व बहुत धूमधाम से मनाते थे। लेकिन आज वहां पर एक भी हिन्दू बचा नहीं है। अब दीपावली में शारदा मंदिर में एक दीपक जलाने वाला कोई नहीं बचा। पाकिस्तान ने एक खूबसूरत मंदिर को मनहूस खंडहर में तब्दील कर दिया।

करतारपुर गुरुद्वारा खुलने के बाद कश्मीरी पंडितों में एक आस जगी थी कि जल्दी ही शारदा मंदिर के लिये भी पाकिस्तान अपने दरवाज़े खोलेगा। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने करतारपुर समारोह के दौरान ऐसा कहा भी था। लेकिन अभी तक इस बारे में कोई कार्रवाई नहीं की गई। मतलब साफ़ है कि धर्म के आधार पर एक अलग देश बनने वाला पाकिस्तान कैसे हिन्दुओं को उनके प्राचीन मंदिर जाने का रास्ता दे सकता है।

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