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विधानसभा चुनावों के बीच मोदी सरकार ने उठाया बड़ा कदम- सस्ते होंगे दाल-तेल, देखें और क्या-क्या होगा सस्ता

सस्ते होंगे दाल-तेल, देखें और क्या-क्या होगा सस्ता

पांच राज्यों में चल रहे विधानसभा चुनाव के बीच आम जनता के लिए रेहत भरी खबर है। केंद्र की मोदी सरकार ने जनता को बड़ी राहत दी है। केंद्र सरकार ने आम जनता को महंगाई से राहत देते हुए खाने पीने की बढ़ती कीमतों में कटौती की है। सरकार ने दालों और पाम ऑयल पर इम्पोर्ट ड्यूटी में कटौती की घोषणा की है। खाद्य मुद्रास्फीति पर काबू पाने के की कोशिशों के तहत सरकार ने ऑस्ट्रेलिया और कनाड़ा से आने वाली दाल पर आयात शुल्क शून्य कर दिया और अमेरिका से आने वाली दाल पर 30% से घटाकर 22% कर दिया है।

सरकार ने कच्चे पाम तेल पर भी सेस को 7.5% से घटाकर 5% कर दिया है। वहीं, मूंग के आयात के लिए विंडो को करीब दो महीने के लिए बंद करने से अचानक फैसले ने उद्योग को चौंका दिया है, दो पहले से ही आयात कॉन्ट्रैक्ट कर चुके हैं। नवंबर में थोड़ी गिरावट के बाद कुकिंग ऑयल की कीमतें भी बढ़ रही हैं। सरसों के तेल की कीमतें अपने पहले के उच्चतम स्तर 175 रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई हैं। 13 फरवरी से आयातित पाम तेल पर शुल्क में कटौती के निर्णय से घरेलू रिफाइनिंग में 60% की वृद्धि होने की उम्मीद है क्योंकि कच्चे पाम तेल और रिफाइंड पाम तेल के बीच शुल्क अंतर 5.5% से बढ़ाकर 8.25% कर दिया गया है।

कंसल्टिंग फर्म सनविन ग्रुप के सीईओ संदीप पाजोरिया के मुताबिक, नवंबर तक घरेलू खाद्य तेल की कीतमों में लगभग 10 से 12 प्रतिशत की गिरावट आई। लेकन, भू-राजनीचिक तनाव, इंडोनेशिया के पाम तेल निर्यात नीति में बदलाव और दक्षिण अमेरिका में सोयाबीन की फसल को लेकर चिंताओं से कीमतों में फिर से तेजी आने लगी है। उद्योग को उम्मीद है कि कच्चे और रिफाइंड पाम तेल के आयात का मौजूदा अनुपात क्रमश: 50:50 है, जो अब कच्चे पाम तेल के पक्ष में बदल जाएगा।

बता दें, मौजूदा समय में दाल की घरेलू कीमतें 70-73 रुपए प्रति किलोग्राम पर चल रही हैं, जबकि न्यूनतम समर्थन मूल्य 64 रुपए प्रति किलोग्राम है। हालांकि रबी की अच्छी दाल की पसल की कटाई इसी महीने शुरू हो गई है, ऐसे में व्यापारी शुल्क में कटौती के समय को लेकर हैरान हैं। सरकार के इस कदम से आम जनता को कीमतों के मुद्दे पर राहत मिलने की उम्मीद है।