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Team India के इस नए कप्तान की कहानी- मां ने थमाया बल्ला- पिता बने कोच लेकिन दादाजी…

टीम इंडिया के इस नए कप्तान की कहानी

अपने मंजिल को पाना इतना आसान नहीं है जितना की सोचने में लगता है। और खासकर क्रिकेटर की दुनिया में तो हजारों खिलाड़ी रोज मैदान पर बल्ला लिए उतरते हैं लेकिन इनमें से कुछ ही लोगों को सफलता मिल पाती है। रास्ते में आए न जाते कितने तुफानों को पार करते हुए तो एक क्रिकेटर टीम इंडिया की जर्सी के मुकाम तक पहुंचता है। भारतीय टीम में जितने भी बल्लेबाज हैं हर किसी ने इतनी मेहनत की है जिसका कोई अंदाजा नहीं लगा सकता है। कुछ ऐसी ही कहानी है टीम इंडिया के नए कप्तान की जिनके टैलेंट को उनकी मां ने पहचाना और उनके दादाजी ने पूरी दिल्ली में क्रिकेटर बनाने के लिए घूमते और मुश्किल वक्त में उनके पिता ही उनके कोच बन गए।

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ये नए कप्तान हैं यश धुल जिन्हें अंडर-19 एशिया कप के लिए भारतीय क्रिकेट टीम ने टीम का कप्तान नियुक्त किया है। अंडर-19 एशिया कप की शुरुआत इसी महीने की 23 तारीख से संयुक्त अरब अमीरात में होने जा रहा है। यश धुल का सफर आसान नहीं रहा है। उनके यहां तक पहुंचने में उनके परिवार और खासर दादाजी के साथ मिला है। ये उनके दादाजी ही थे जो उन्हें मैच खिलाने ले जाते थे, वह एक दिन में दो मैच खेला करते थे और अपने दादाजी के साथ सफर किया करते थे। उनके दादाजी जगत सिंह सेना में थे और पूरी दिल्ली में वह अपने पोते को लेकर घूमते थे। अब जबकि यश ने अपने करियर में बड़ा मुकाम हासिल किया है तो उसे देखने के लिए उनके दादाजी जिंदा नहीं हैं। तीन साल पहले उनका दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। यश उनके काफी करीब था। बुरी आदातों और संगत से बचने के सलाह हो या फिर हर प्रैक्टिस सेशन के लिए कहीं ले जाना हो यहां तक कि प्रैक्टिस सेशन के दौरान वो अपने पोते का तब तक वहीं, इंतजार करते थे जब तक वह अपना खेल नहीं खत्म कर लेगे थे। उनके दादाजी हमेसा उनके साथ रहे हैं।

यश के क्रिकेट करियर की शुरुआत उनकी मां की वजह से हुआ। उनकी मां ने उन्हें छह साल पहले शैडो प्रैक्टिस करते देख लिया वो भी बिना बल्ले के। उनकी मां ये देखते ही समझ गईं की उनके बेटे को अगर मौका मिल जाए तो जरूर टीम इंडिया में शामिल हो सकते हैं। फिर क्या था उनके सफर का यहीं से शुरूआत हो गया और उन्होंने बेटे को जनकपुरी में एयलाइनर क्रिकेट एकेडमी में भर्ती करा दिया।

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मां और दादाजी के बाद पिता उनके जिवन में कोच की भूमिका निभाए। जब कोरोना महामारी आई और लॉकडाउन लगा तो सबकुछ बंद हो गया था ऐसे में वो प्रैक्टिस के लिए एकेडमी नहीं जा सकते हैं। उनके क्रिकेट करियर पर लॉकडाउन की वजह से कोई प्रभाव न पड़े इसके लिए उनके पितान ने घर पर ही नेट्स लगवा दिया। उनके घर की छत पर नेट्स लगा दिया। उनके परिवार के हर एक का हाथ उनके सर पर रहा जिसकी वजह से वो आज यहां तक पहुंचे है।