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Saudi Fatwa से मौलानाओं में खलबली, पाकिस्तान-इंडिया में भी मस्जिदों से उतरेंगे लाउडस्पीकर!

इंडिया-पाकिस्तान की मस्जिदों से उतरेंगे लाउडस्पीकर

मस्जिदों मे लाउडस्पीकर पर बैन लगाने वाले सऊदी अरब के फत्वे पर बवाल मचने लगा है। पाकिस्तान सहित कई मुस्लिम देशों ने बवाल के डर से चुप्पी साध ली है। इस्लामिक रिपब्लिक पाकिस्तान के मौलानाओं ने इस फतवे को मानने से इंकार कर दिया है। भारत के मुसलमानों की भी इस पर अलग-अलग राय हैं।  सऊदी अरब की एक मस्जिद के अलावा पाकिस्तान की लगभग सभी मस्जिदों में लाउड स्पीकर से नमाज-अजान अभी तक जारी है। सऊदी अरब के लोगों का कहना है कि यह बात सही कि मुहम्मद साहब के जमाने में लाउडस्पीकर नहीं थे लेकिन उन्होंने हिदायत दी है कि नमाज-अजान पढ़ते समय तुम्हारी आवाज से तुम्हारे बगल वाले नमाजी को दिक्कत न हो।

सऊदी अरब के लोगों का कहना है किसरकार के अलावा मुफ्ती-ए-काबा का फतवा एहतराम के काबिल है। अगर मस्जिदों से हो रहे नमाज के शोर से लोगों को तकलीफ हो रही है तो लाउडस्पीकर से नमाज पढ़ना नाजायज है। सऊदी अरब में यह मुद्दा सोशल मीडिया पर चर्चा में है। सऊदी अरब के इस्लामी मामलों के मंत्री अब्दुल्ला आतिफ अल शेख का कहना है कि मस्जिदों के लाउड स्पीकरों के शोर से बुजुर्गों और बच्चों के आराम में दखल की शिकायतें मिल रही थीं। लाउड स्पीकरों पर रोक लगाने से पहले जब कुरान-और हदीस का अध्ययन किया गया तो पाया गया है कि मुहम्मद साहब ने भी ऊंची आवाज में नमाज न पढ़ने की हिदायत दी है।

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सऊदी अरब की राजधनी रियाद में मस्जिदों के लाउडस्पीकरों पर बैन लगाने का स्वागत किया है। पूरे रियाद अब एक ही ऐसी मस्जिद है जिसने लाउडस्पीकर नहीं उतारे या आवाज कम नहीं की है, बाकी सभी मस्जिदों में सरकारी हुक्म को तामील किया गया है। सऊदी अरब की जकात पर जीने वाले पाकिस्तान की मस्जिदों में लाउडस्पीकर से नमाज बाकायादा जारी है। पाकिस्तान के मौलानाओं ने इमाम-ए-काबा और सऊदी शाह दोनों की राय मानने से इंकार कर दिया है। ऐसा लगता है कि पाकिस्तान के मौलाना खुद को पैगंबर मुहम्मद साहब से भी ऊपर मानते हैं। इसीलिए बिना शोर मचाए या बिना किसी को डिस्टर्ब्ड किए नमाज पढ़ना उन्हें अपनी शान में गुस्ताखी लगता है।

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भारत के जाने-माने इस्लामिक स्कॉलर और मौलाना शोएब कासमी का कहना है कि मस्जिदों पर लाउडस्पीकर टांगकर अजान देना सिर्फ शेखी बघारना है। ईश्वर या अल्लाह को दिल से याद किया जाए और दिल से आवाज लगाई जाए तो वो सुन लेता है। ऐसा नही है कि मस्जिद की मीनारों पर लाउडस्पीकर से जोर-जोर से चिल्लाने से ही अल्लाह मियां के कानों तक आवाज पहुंचेगी। ऐसा भी नहीं है कि जब मस्जिद के लाउडस्पीकर से अजान की आवाज आएगी तभी नमाज पढी जाएगी। अगर आप पांच वक्ता नमाजी हैं तो मस्जिद के इमाम की अजान से पहले भी मस्जिद जाकर नमाज पढ़ सकते हैं। मौलाना कासमी कहते हैं कि कोई भी ऐसा काम जिससे किसी को तकलीफ होती है वो नहीं करना चाहिए। चाहे वो लाउडस्पीकर से अजान देना ही क्यों न हो।